तँय पढ़ा, तँय पढ़ा, तँय पढ़ा गुरूजी ।अब कोनो रहय झन अड़हा गुरूजी।तँय पढ़ा, तँय पढ़ा, तँय पढ़ा गुरूजी ।एक-एक कक्षा, सौ-सौ लइका,फेर हर लइका ल ज्ञान दे।का व्यवस्था हे का बेवस्था ,एला तँय झन धियान दे।तोरे भरोसा हे कइसनो कर फेर,तहीं ह जोखा मढ़ा गुरूजी।तँय पढ़ा, तँय पढ़ा, तँय पढ़ा गुरूजी ।जेन लइका स्कूल नइ आवय,ओला स्कूल म लाने ला परही।नीति हे शासन के चाहे बिन चाहे,तोला सबो ला माने ला परही ।सीखय भले झन, फेर साक्षर कहाही ,नाँव ला रजिस्टर म चढ़ा गुरूजी।तँय पढ़ा,तँय पढ़ा, तँय पढ़ा गुरूजी ।फोकट म सबला,सब कुछ चाही,नवाँ जमाना के इही लोकतंत्र ये ।चलनी म चाल फेर रजगा झन निकाल,सस्ता लोकप्रियता के इही मूलमंत्र ये।खिंच-तान अउ ढकेल-पेल फेर,सबो ल आगु बढ़ा गुरूजी।तँय पढ़ा, तँय पढ़ा, तँय पढ़ा गुरूजी ।न बने बिजहा,न उपजाऊ भुइयां,न बने खातू ,न हवा पानी ।परही तुतारी, तुही ल रे बइला,तोरे भरोसा होही किसानी ।भले भूख मरबे नइ पाबे चारा,फेर फसल रहय झन कड़हा गुरूजी ।तँय पढ़ा,तँय पढ़ा तँय पढ़ा गुरूजी ।मथुरा प्रसाद वर्मा "प्रसाद'ग्राम-कोलिहा ,लवन बलौदाबाजार ( छ० ग०)
मथुरा प्रसाद वर्मा एक क्रियाशील शिक्षक है साथ ही एक कवि और साहित्यकार है . छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य के
- मथुरा प्रसाद वर्मा 'प्रसाद'
- कोलिहा लवन , बलौदाबजार, छत्तीसगढ, India
- नाम- मथुरा प्रसाद वर्मा पिता- स्व. जती राम वर्मा माता- श्रीमती पितरबाई वर्मा जन्मतिथि- 22-06-1976 जन्मस्थान - ग्राम -कोलिहा, जिला-बलौदाबाजार (छ ग ) कार्य - शिक्षक शा पु मा शाला लहोद, जिला बलौदाबाजार भाटापारा शिक्षा - एम् ए ( हिंदी साहित्य, संस्कृत) डी एड लेखन- कविता, गीत, कहानी,लेख,
गुरुजी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गुरुजी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
छत्तीसगढ़ी व्यंग्य : तँय पढ़ा,तँय पढ़ा तँय पढ़ा गुरूजी ।
Labels:
गुरुजी,
छत्तीसगढ़ी कविता,
छत्तीसगढ़ी गीत,
शिक्षा पर व्यंग,
chhattisgarhi git,
kavi mathura prasad verma
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
विशिष्ट पोस्ट
रूपमाला छन्द
you tube में सुने साँस मोरे जब जुड़ावय, तोर अचरा पाँव। जब जनम लँव मँय दुबारा, तोर ममता छाँव। मोर दाई तोर बर हम , हाँस के दँन प्र...