भँवर है लहर है किनारा नहीं है।
ये मजघार है पर सहारा नहीं है।
सच कहे ले काय होही।झूठ हर भरमाय होही।जे लबारी मार लेथे,पेट भर के खाय होही।देश आगी मा जरत हे,कोई तो सुलगाय होही।पोठ पहरा हे पुलिस के,चोर मन जुरियाय होही।भूख मा लइका बिलखथे,भात दाई लाय होही।मँय इँहा बिजहा मया के,बोंय हँव ममहाय होही।छोड़ देअब तँय सियानी,शेर मन हा गाय होही।फेर मनमाने पियत हे,आज धोका पाय होही।मापनी 2122 2122
2122 2122 212भूख मनखे ला कहाँ ले जात हे।आदमी हा आदमी ला खात हे।रोज चर्चा होत हे अखबार मा,राजनेता बइठ के पगुरात हे।चाट के हम नून बासी खात हन,प्याज आलू के कहाँ औकात हे।प्यार के माने बदल गे आजकल,जेब भारी देख दिल हरियात हे।भ्रष्ट होगे सब व्यवस्था देख तो,देश करजा मा बुड़े चिचियात हे।धान के बिजहा लगा के रोत हनखेत मा करगा खड़े अटियात हे।का भरोसा हम करन बरसात के।रोज बादर हा घलो तरसात हे।कोन थारी भर मया परसे भला,दार नइ हे तब रिसाए भात हे।
you tube में सुने साँस मोरे जब जुड़ावय, तोर अचरा पाँव। जब जनम लँव मँय दुबारा, तोर ममता छाँव। मोर दाई तोर बर हम , हाँस के दँन प्र...