जमे जमाय बिराना पड़थे।रीता कर रितियाना पड़थे।जोड़े कतको गोटी माटी,छोड़ सबो ला जाना पड़थे।खोंदरा नवां बनाना पड़थे ।खोज के दाना खाना पड़थे।ये जिनगी ले जतका लेबे,करजा जमो चुकाना पड़थे।वोखर बुलाय आना पड़थे।अपन करम सोरियाना पड़थे।का बोये हँव काटे परही ,सुरता कर पछताना पड़थे।निभय नहीं त निभामा पड़थे ।अचरा मा गठियाना पड़थे।मया ह माँगे मिलय नहीं जी,जोहत जिनगी बिताना पड़थे।
मथुरा प्रसाद वर्मा एक क्रियाशील शिक्षक है साथ ही एक कवि और साहित्यकार है . छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य के
- मथुरा प्रसाद वर्मा 'प्रसाद'
- कोलिहा लवन , बलौदाबजार, छत्तीसगढ, India
- नाम- मथुरा प्रसाद वर्मा पिता- स्व. जती राम वर्मा माता- श्रीमती पितरबाई वर्मा जन्मतिथि- 22-06-1976 जन्मस्थान - ग्राम -कोलिहा, जिला-बलौदाबाजार (छ ग ) कार्य - शिक्षक शा पु मा शाला लहोद, जिला बलौदाबाजार भाटापारा शिक्षा - एम् ए ( हिंदी साहित्य, संस्कृत) डी एड लेखन- कविता, गीत, कहानी,लेख,
छोड़ सबो ला जाना पड़थे।
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