2122 2122 212भूख मनखे ला कहाँ ले जात हे।आदमी हा आदमी ला खात हे।रोज चर्चा होत हे अखबार मा,राजनेता बइठ के पगुरात हे।चाट के हम नून बासी खात हन,प्याज आलू के कहाँ औकात हे।प्यार के माने बदल गे आजकल,जेब भारी देख दिल हरियात हे।भ्रष्ट होगे सब व्यवस्था देख तो,देश करजा मा बुड़े चिचियात हे।धान के बिजहा लगा के रोत हनखेत मा करगा खड़े अटियात हे।का भरोसा हम करन बरसात के।रोज बादर हा घलो तरसात हे।कोन थारी भर मया परसे भला,दार नइ हे तब रिसाए भात हे।
मथुरा प्रसाद वर्मा एक क्रियाशील शिक्षक है साथ ही एक कवि और साहित्यकार है . छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य के
- मथुरा प्रसाद वर्मा 'प्रसाद'
- कोलिहा लवन , बलौदाबजार, छत्तीसगढ, India
- नाम- मथुरा प्रसाद वर्मा पिता- स्व. जती राम वर्मा माता- श्रीमती पितरबाई वर्मा जन्मतिथि- 22-06-1976 जन्मस्थान - ग्राम -कोलिहा, जिला-बलौदाबाजार (छ ग ) कार्य - शिक्षक शा पु मा शाला लहोद, जिला बलौदाबाजार भाटापारा शिक्षा - एम् ए ( हिंदी साहित्य, संस्कृत) डी एड लेखन- कविता, गीत, कहानी,लेख,
छत्तीसगढ़ी गजल : आदमी हा आदमी ला खात हे।
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