सुरता हावय तोला?
तैं हांस के गोठियाय करस—
"गैस के चुल्हा चाही,
फ्रिज चाही,
वाशिंग मशीन चाही...
नइ ते तोर संग भांवर नइ परंव।"
मैं बस हांस देवेव,
काबर के मोर खीसा म सिरिफ
तोर मया रिहिस,
अउ आंखी मा सपना।
हमर उरझी-सुरझी गोठ हाँसी म सिरा जावय,
फेर एक दिन ए जिनगी ह सिरतोन म जीत गे।
तैं चल देस...
कोनो दूसर के अंगना के अंजोर बन के।
अउ मैं बखत के भठ्ठी म,
धीरे -धीरे पाकत रेहेंव।
आज मोर घर म
गैस के चुल्हा हावय,
फ्रिज हे,
मशीन हे,
अउ अब्बड़ अकन सउख के जिनिस हावय...
बस, जेकर बर ए सबो कमाय ,
वो तैं नइ हस।
अब रोटी ह बिना धुंवा के चुर जाथे,
फेर हर कौरा म तोर सुरता के धुंवा उठथे।
फ्रिज म ठंडई तो अब्बड़ हे,
फेर तोर हांथ के हुमसा ताप कहूँ नइ हे।
घर ह सबो जिनिस ले भर गे हावय,
फेर मोर हिरदे आज ले तोर कमी ले रीता हावय।
सुन तो...
तोर मांगे सबो चीज ला बिसो लेंव मैं ह,
बस एक तैं भर रहे गेस ...
जेला कोनो बजार ले कभू बिसो नइ पायं।
सबो कुछ हे... बस एक तैं नइ हस।
