भँवर है लहर है किनारा नहीं है।
ये मजघार है पर सहारा नहीं है।
महगाई ह फेर मसान हो गे।
जनता के मरे बिहान हो गे।
हमरे खा के हमी ल भूँकय,
घर घर हा पाकिस्तान हो गे।
सच कहत हँव फेर मार खाहुँ,
लबरा मन हा आसमान हो गे।
मिठ मिठ खा करू उगल दे,
संविधान घलो पान हो गे।
हक बर लड़े गरीब मन के,
तोर महल आलीशान होगे।
आशीष जभे गुरु के मिलगे
गंगाधर शक्तिमान होगे।
बिपत म जेन साथ दे थे
सम्मत म उही आन हो गे।
संसद मा बोलत हे घुघवा।
गाँव गली हर वीरान होगे।
दारू भट्ठी हे बहुत जरूरी,
सरकारी स्कूल बेजान हो गे।
इस ग़ज़ल को यु ट्यूब पर देखे
2122 2122 2122रोज करथे आजकल अखबार चर्चा।गाँव घर होवत गली अउ खार चर्चा।भूखे ला रोटी नहीं पव्वा घरा दे,काम खोजत झन करै बनिहार चर्चा।झन नवाँ माथा न अत्याचार सह तँय,हक के खातिर कर ले बारम्बार चर्चा।वो फलाना सँग फलानी भाग गे हे,गाँव भर माते हवय जी मार चर्चा।कान मा ठेठा हवे झन बोलबे तँय,नइ सुनय जी काखरो दरबार चर्चा ।चुप हवय सिधवा भले, डरपोक नइ हे,बोलही तब हो जही सरकार चर्चा।मेरखू फ़ोकट कथे आवास दे दे,बिन कमीशन बंद हे बेकार चर्चा।तब कलम लड़थे इहाँ मजबूर हो के,हार जाथे जब करत तलवार चर्चा।चल घुमा दे ना शहर पिज़्ज़ा खवा दे,छी दई ये रात दिन के टार चर्चा।प्यार के दु बोल मिट्ठी बोल अब तो,सुन मया हे तब सुहाथे सार चर्चा।
नदियाँ तीर रहिथव फेर मँय हा प्यासा आँव,
मोर मयारू मँय जन जन के आसा आँव,
अपने घर मा काबर हँव निर्वासित मँय,
छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी भासा आँव।
कहाँ नदावत हम सब के चिन्हारी हा।
ये छत्तीसगढ़ी भाखा महतारी हा।कइसे परबुधिया होगे सब लइका मन,मार डरिस हमसब ला लाचारी हा।
शिक्षा दीक्षा सबला ज्ञान अंजोर दिही।सरल सुगम सुंदर भाखा हे सोर दिही।उही ल अब मँय राज दुहु छत्तीसगढ़ के,मोला छत्तीसगढ़ी भाखा मोर दिही।x
you tube में सुने साँस मोरे जब जुड़ावय, तोर अचरा पाँव। जब जनम लँव मँय दुबारा, तोर ममता छाँव। मोर दाई तोर बर हम , हाँस के दँन प्र...