भूख गरीबी ले भले, जनता हे लाचार।फुलत फरत हावे तभो, कइसे भ्रष्टाचार।कइसे भ्रष्टाचार, नाग कस फन फैला के।लीलत हावय देश, धरम ला बिख बगरा के।निज स्वारथ जे लोग, बने हे चोर फरेबी।हे उखरे बैपार, हमर ये भूख गरीबी।बेचावत हे न्याव हा, खड़े बीच बाजार ।संग धरे हे चोर के, अब जम्मो रखवार।अब जम्मो रखवार, लूट के खा थे सबला।काकर तिर गोहार, करय जी जनता अबला।अपराधी मन पोठ, रोज होवत जावत हे।लोग बने लाचार, न्याव हा बेचावत हे।जन गन मन के साथ मा, हे अधिनायक कउन।जय हे स्वारथ साधना, भाग्य विधाता मउन।भाग्य विधाता मौन, खड़े हे काबर बोलय ।लोकतंत्र मा लोक, कहाँ हे राज ल खोलय।राजनीति हा बोंय, हवे ये बीज पतन के।धन बल छल अटियाय, चलय ना जन गन मन के।
मथुरा प्रसाद वर्मा एक क्रियाशील शिक्षक है साथ ही एक कवि और साहित्यकार है . छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य के
- मथुरा प्रसाद वर्मा 'प्रसाद'
- कोलिहा लवन , बलौदाबजार, छत्तीसगढ, India
- नाम- मथुरा प्रसाद वर्मा पिता- स्व. जती राम वर्मा माता- श्रीमती पितरबाई वर्मा जन्मतिथि- 22-06-1976 जन्मस्थान - ग्राम -कोलिहा, जिला-बलौदाबाजार (छ ग ) कार्य - शिक्षक शा पु मा शाला लहोद, जिला बलौदाबाजार भाटापारा शिक्षा - एम् ए ( हिंदी साहित्य, संस्कृत) डी एड लेखन- कविता, गीत, कहानी,लेख,
कुण्डलिया प्रसाद के
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