फूल सहीं ममहाये कर।
सुरता जब जब आ जाथे,
गीत ला मोरे गाये कर।
अतके दिन के साथ हमर,
झन सोंचे पछताये कर।
भूख हजागे तन मन के,
मोर लिए भी खाये कर।
सुख नइ दय सोन के पिंजरा,
लालच में मत आये कर।
फेंके शिकारी मन दाना,
देखे कर उड़ जाये कर।
बादर नदिया पेड़ हवा,
जिनगी ला समझाये कर.

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