ये ढंग अभी बदलना परही।
खुद तोला अब चलना परही।
सब सपना सच होथे पगला,
हर साँचा मा ढलना परही।
अँधियारी नइ रोकय रद्दा,
बस जोगनी बना जलना परही।
नइ जाने जे समय के कीमत
इकदिन हाथ ल मलना परही।
दौड़त भागत गिर गे हस ता ,
रेंगत आगू खसलना परही।
ठिहा ठिकाना मिल जाही रे,
चल चल चल चल चलना परही.
प्यास नहीं चिन्हय घाट ल,
पानी मिलगे पीना परथे।
सुख दुख घाम मिलय या छइहाँ
तबले सब ला जीना परथे।
ये सब होही तोर पहटिया,
छोड़ इखर सँग

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