रोज नवाँ घोटाला दिही।
डवकी,लइका, साला दिही।
फ़ोकट मा अब ताला दिही।
रोज नवाँ मसाला दिही।
भुखउ ला काबर निवाला दिही।
जपे बर सबला माला दिही ।
हर हाथ म प्याला दिही।।
कोन हा कोन ला,काला दिही।।
भाजपा नेता माननीय श्री सोहन पोटाईजी नेएक जन सभा को सम्बोधित करते हुए आउट सोर्सिंग के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी। उनके साहस को सलाम।
बात तो सही बोलेव , पोटाई जी ।
आप तो मुह खोलेव , पोटाई जी।
आउट सोर्सिंग के सच बोले हव।
सरकार।के नियत खोले हव।
छत्तीसगढ़िया मजबूर के कतका।
कसाई के हाथ म छेरी जतका।
पार्टी अनुशासन टोरेव फेर ,
माटी के संग होलेव पोटाई जी।
माटी के तै कर्जा चूका दे।
चट्टू मन के मुड़ ल झुक दे।
छत्तीसगढ़िया शेर दहाड़े।
कुनीति के जबड़ा फाडे।
देर करे फेर आखिर बोल े
भेद बड़े खोलेव , पोटाई जी।
जिए-खाये बर परदेश जाथन।
जांगर तोर हमें कामथन।
तभो ले नई हे हमर बनौती।
जिनगी हमर रोज।चुनौती।
चीख चीख के आज गली म
पीरा ल हमर रो लेव पोटाई जी ।
बाहिर के जब नेता मंत्री।
बाहिर के सब ऑफिसर सन्तरी।
का करही ये हमर उद्धार।
बैपारि ये करही बैपार ।
छत्तीसगढ़िया जोहर हे तोला
स्वाभिमान दिल म घोलेव , पोटाई जी।
मथुरा प्रसाद वर्मा प्रसाद
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