मँय पैरी लेहव गोड़ बर, अउ माला ला घेच के।।
तँय किंदर दुनियां भले, फिर आबे अब गाँव रे।
गूगल बाबा हे गजब, खोज जिनिस सब लाय।
कोन वेबसाइट कहाँ, का का करे बताय । 1।
मजेदार यू ट्यूब हे, विडियो के भरमार।
बइठ अपन घर देख ले, पल भर मा संसार ।2।
फेमस हे संसार मा , फेसबुक महाराज।
पहली करथे पयलगी ,छोड़ जबो सब काज।3।
सुग्घर हे विकिपीडिया , भरे ज्ञान भंडार।
सब भाखा सब विषय मा, मिलही तोला सार।4।
पनिहारिन मन घाट मा,सुख दुख ल गोहराय।
ट्विटर म घलो वइसने , चहल पहल सकलाय।5।
नेट रेट हा बाढ़गे, सर्वर होगे लेट।
गेट गेट मा वेट हे ,काकर भरबो पेट। 6।
दिन भर नाचय अंगरी, रंग मंच कीबोड।
मेमोरी कतको बढ़े ,डेटा ओवरलोड।7।
रिश्ता नाता नेट मा , मया मयारू गोठ ।
सोसल मिडिया मा जुरे, बतियावत हे पोठ।8।
इंटरनेट रईछई, दुनियाँ भर बगराय।
जइसे जाला मेकरा, भितरभितर लपटाय। 9।
एम एस ऑफिस मा सरल, सब दफ्तर के काम।
पढ़ना लिखना पोछना , सकल बुता आराम।10।
नेट म बैंकिंग ह सरल, लेन देन सदुपाय।
जल्दी जल्दी मा घलो ,सकल काज सलटाय।11।
चुल्हा माटी के हमर, घर भर बर जर जाय।
पेट जरे झन काकरो, मालिक करव उपाय।1।
छेना लकड़ी नइ बरय, चुल्हा हर कुहराय।
कलकलहिन हो बहुरिया ,सुख घर के जर जाय।2।
सबला देथे राँध के ,सुग्घर मन हरसाय।
घर के चुल्हा हाँसथे, नारी जब मुस्काय।3।
आगी चुल्हा मा बरे, घर भर हर सकलाय।
डबकत चाहा संग जी, सबके मया बंधाय। 4।
दाई चुल्हा गोरसी, छेना लकड़ी बार।
घर के सुनता झन बरे, सुखी रहे संसार। 5।
जब घर के चुल्हा फुटय, मुड़धर रोय सियान।
भाई-भाई लड़ मरय, तिरिया चरित महान।6।
गोरस चुरोय गोरसी , चुल्हा हा जी चाय।
नेवरनिन के मन चुरय, छोड़ बिछौना जाय।7।
चुल हा चुल्हा म चु लहा, बारे बर बम्बार।
जिनगी हे दिन चार के, चलना सोच विचार।8।
✍🏼मथुरा प्रसाद वर्मा "प्रसाद"
🙏🏼 बबा गुरु घासीदास जी के चरण म मोर दोहा 🙏🏼
जात पात मानय नहीं ,सत के महिमा गाय।
पावन जेखर आचरण, वो सतनामी आय।1।
नशापान अब बंद कर , मांसाहार ल त्याग।
ज्ञान गुरु के हे इही , सतनामी तँय जाग।2।
मनखे आघू झन नवव, करव सिरिफ सम्मान।
जात पात ला त्याग के, सत बर दे दव जान।3।
अमरौतिन के लाल तँय ,मँहगू के संतान ।
जनम धरे सतकाज बर, बाँटे सत के ज्ञान।4।
जैतखाम सत बर खड़े,धजा स्वेत लहराय।
गिरौदपुर के धाम हर , सत के जस बगराय।5।
कपट करे मा साधना, अउ लालच मा त्याग।
भोग करे महिमा घटय ,मोह मया बैराग ।6।
सत बर देथे प्रान ला , तप बर त्यागे भोग।
साधक बाबा के सरल, जिनगी उंखरे जोग ।7।
चमत्कार तो ज्ञान हे, दिये गुरु बगराय।
ठगनी जग ठगता फिरय, निज स्वार्थ बिलमाय । 8।
🙏🏼
मथुरा प्रसाद वर्मा ' प्रसाद'
जियत भर तो लगे रही, मोह मया के राह।
ये तन इहें जर जही, छूूूट जही सब चाह।१।
रोटी पानी पेट ला , दे दे पालनहार।
रोज रोज के बइठका, करत रही सरकार।२।
नीति कुनीति बिचार के, जीभ तोर लहुटार।
जीभ डोले जिया जले, जर जाए संसार।३।
मुफ़त म देथे बाँटके, दार भात सरकार।
पुरसारथ गिरवी धरे, जनता हे लाचार।४।
छोड़न छाडन बर कहूँ, छोड़ दिही संसार ।
छि छि अइसन प्रेम ला, बार बार धिक्कार।५।
पेट म रोटी ओनहा, तन बर दे दे आज।
छइहाँ दे दे ढाकहूँ, मुड़ ल घलो महराज।।६
माँगत माँगत तोर से , लगे नहीं अब लाज।
देने वाला हस तहीं, देवत हस महाराज।७।
कइसे होही कहव का, ये जिनगी हा पार।
डोंगा डगमग डोलथे, फसे बीच मजधार।८।
नीयत मा हे गंदगी, कुछ तो होय निदान।
भ्रष्टाचारी बर चलय, हाथ सफइ अभियान।९।
शाला में ताला लगे, मदिरालय आबाद।
व्यापारी राजा हमर, पीढ़ी एक बर्बाद।१०।
लोभी कामी मन इहाँ,बने पुजेरी आज।
करम धरम जानै नही,हमर हवै महराज।11।
लोकतंत्र मा वोट के, महिमा अपरंपार।
बेचारा जनता बने, मजा करे सरकार।12।
बिन पइसा के आप ला , मिले नहीं अब मान।
दो कौड़ी के भाव मा, बेचावत ईमान।।13
मया अउ बन के मिरगा, भटकत खारे-खार।
मया करे ले ही कहूँ, मिलय मया नइ यार।14।
मया मरम जानय नहीं, मया मया चिचियाय।
पल भर मा जर के सहीं, चढहे उतरे हाय। ।1।
काकर बर मैं राखहूँ, ये हिरदे सिपचाय।
बइरी होंगे हे मया, जीय ल मोर जलाय।2।
मया परे तन हा जरय, मन प्यासे मर जाय।
तन मन पैरावट सहीं, भितर भितर गुगवाय।3।
आँखी काजर आँज के, लाली ओठ रँगाय।
रूप सजा के मोहनी , बिजुरी मन म गिराय।4।
संगी रे तोर सुरता, जब जब मोला आय।
जिनगी बोझा कस लगे, सांस आय अउ जाय।।5।
कइसे होही का कहव , ये जिनगी हा पार।
डोंगा डगमग डोलथे, फसे बीच मजधार।6।
मन मिरगा संसार मा, भटकय खारे-खार।
मया करे ले ही कहूँ, मिलय मया नइ यार।7।
मथुरा प्रसाद वर्मा
मीठलबरा के गोठ ह चलथे।
सिरतोन कहे म जम्मो उसलथे।
करम कमाई कोनो नई पूछय,
बेईमानी के सिक्का चलथे।
उही बनाते इहाँ सड़क ल,
खा के डामर पेट ह पलथे।
कानून कायदा, खेलवारी होंगे
मतलब परगे साचा म ढलथे।
राजनीती के चिक्कन रद्दा
सोजमतिहा के पांव खसलथे ।
झपट परे सब गुर कस चाटा,
जे नई पावय हाथ ल मलथे।
उहि ह पाथे ठीहा ठिकाना
गिरे परे म घलो खासलथे ।
धीरज धर चल परसाद सरलग,
दौड़ाइए हर हपट के मरथे।
मथुरा प्रसाद वर्मा प्रसाद
अपील हे, अनुरोध है।
बालक ये अबोध हे।
कहत हौ सुन लव।
मने मन गुन लव।
हाथ जोड़ के बिनती हे।
साल दर साल
देश के माथा म
चटक जाथे
एक अउ गिनती हे।
में आज तक नई
समझ पायेव
खुश होवव
की रोवव।
झन सरमा तँय यार गदहा रे।
तोरे सहीं संसार गदहा रे ।
नारियाये बर सबे नारियाथे
तही ह खाथस मार गदहा रे।
लड़ चुनाव मंत्री बन जाबे,
मिहनत हे बेकार गदहा रे।
पढहे लिखे मन करय मजूरी ,
सिस्टम हे बेकार गदहा रे।
का सासन अउ का परसासन ,
माते भ्रस्टाचार गदहा रे।
बड़े बड़े ल कोन सुधारय ,
संसद हे लाचार गदहा रे।
लगाये मुखउटा बाटय गियान,
तोरे रिस्तेदार गदहा रे ।
कतको चेला आघू पाछु,
रोज खड़े हे दुवार गदहा रे।
नियत म तोर वफादारी हे,
तभे खड़े लाचार गदहा रे।
तहुँ हा ऊँचा पदबी पाबे,
बन थोड़ा मक्कार गदहा रे।
कहे प्रसाद पुकार गदहा रे,
झन करबे कभू प्यार गदहा रे।
हो जाही कहूँ तोरो शादी
जिनगी तब बेकार गदहा रे।
झूठ लबारी मार झन।
भूल ककरो उपकार झन।
आह घलो हा लग जाथे
छानही ककरो ओदार झन।
तीर तार के डूबकैया आस ,
भरे तरिया के पार झन।
हिरदय के मोर हाल पूछ के,
जरे म अउ नून डार झन।
बोर दे चाहे पार लगा,
गठबंधन सरकार झन।
तरी तरी मसकत मलाई,
दीया ल अभी बार झन।
रखवार हे गोल्लर ह इहाँ के,
रइचर ल अभी तार झन।
परसाद जे कोनो सरन म आवे,
कभू ओला दुत्कार झन।
भाजपा नेता माननीय श्री सोहन पोटाईजी नेएक जन सभा को सम्बोधित करते हुए आउट सोर्सिंग के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी। उनके साहस को सलाम।
बात तो सही बोलेव , पोटाई जी ।
आप तो मुह खोलेव , पोटाई जी।
आउट सोर्सिंग के सच बोले हव।
सरकार।के नियत खोले हव।
छत्तीसगढ़िया मजबूर के कतका।
कसाई के हाथ म छेरी जतका।
पार्टी अनुशासन टोरेव फेर ,
माटी के संग होलेव पोटाई जी।
माटी के तै कर्जा चूका दे।
चट्टू मन के मुड़ ल झुक दे।
छत्तीसगढ़िया शेर दहाड़े।
कुनीति के जबड़ा फाडे।
देर करे फेर आखिर बोल े
भेद बड़े खोलेव , पोटाई जी।
जिए-खाये बर परदेश जाथन।
जांगर तोर हमें कामथन।
तभो ले नई हे हमर बनौती।
जिनगी हमर रोज।चुनौती।
चीख चीख के आज गली म
पीरा ल हमर रो लेव पोटाई जी ।
बाहिर के जब नेता मंत्री।
बाहिर के सब ऑफिसर सन्तरी।
का करही ये हमर उद्धार।
बैपारि ये करही बैपार ।
छत्तीसगढ़िया जोहर हे तोला
स्वाभिमान दिल म घोलेव , पोटाई जी।
मथुरा प्रसाद वर्मा प्रसाद
you tube में सुने साँस मोरे जब जुड़ावय, तोर अचरा पाँव। जब जनम लँव मँय दुबारा, तोर ममता छाँव। मोर दाई तोर बर हम , हाँस के दँन प्र...